जहाँ मे जितनी भी इज़्ज़त है सिर्फ़ दाम की है
ये बात जान लो लोगों ये बात काम की है
तमाम झूठ हैं झगडे हैं बेवफ़ाई है
हमारे बीच मुहब्बत तो सिर्फ़ नाम की है
वो मुझसे वस्ल के लम्हों मे यूँ भी कहती थी
कि मुझपे सिर्फ़ हुक़ूमत मेरे ग़ुलाम की है
कहा था उसने बिछड़कर मैं जी न पाऊँगी
ये बात आज के जैसी ही एक शाम की है
कहीं पे जाके भुगतनी पड़ेगी ध्यान रहे
किसी के पास भी दौलत अगर हराम की है
Piyush Agnihotri