Shivsagar Sahar

किसी के ख़ून से नक्शा नहीं बनाऊँगा
दरख़्त काट के रस्ता नहीं बनाऊँगा

यहाँ सभी को परिंदों की तरह छूट मिले
किसी भी मुल्क में सीमा नहीं बनाऊँगा

तेरा ये हुस्न तो ऐसे ही माहताब लगे
मैं इसलिए कोई गहना नहीं बनाऊँगा

अगर ज़मीं पे बसाउँगा इक नई दुनिया
मैं तुमसे दूर मोहल्ला नहीं बनाऊँगा

मुझे पसंद नहीं दूसरा कोई भी रूप
कभी भी चेहरे पे चेहरा नहीं बनाऊँगा

तेरे बग़ैर जो हर एक वक़्त गुज़रेगा
उसे कभी कोई मुद्दा नहीं बनाऊँगा
Shivsagar Sahar

Shivsagar Sahar | We The Sukhanwar