चाँद का यह सफ़र इतना मुमकिन कहाँ
अह्द जब कर लिया तो दिया इम्तिहाँ
मुल्क पहुँचा नहीं कोई अबतक वहाँ
नाज़ हमपर करेगा ये सारा जहाँ
रात दिन चाँद पर होगा रंगी समाँ
झूम उठ्ठी यही सोचकर कहकशाँ
हम कदम दर कदम आगे बढ़ते रहे
एक दो तीन कर यान उड़ते रहे
खोज़ दिन रात हम अपनी करते रहे
अपनी मेहनत लगन से निखरते रहे
अब ख़ुदा भी हमीं पर हुआ मेहरवाँ
झूम उठ्ठी यही सोचकर कहकशाँ
देखो पूरा किया हमने अपना कथन
साथ मिल कर किये ख़ूब सारे जतन
तब कहीं जा मिला हमको धवला रतन
अब भरोसा करें हमपे अहल-ए-ज़मन
नाज़ करने लगा देखो सारा जहाँ
झूम उठ्ठी यही सोचकर कहकशाँ
सब हुनर से हमारे ठिकाने लगे
चाँद पर भी ज़मीं से निशाने लगे
कारनामे हमारे लुभाने लगे
गीत सूरज सितारे भी गाने लगे
चंद्रमा पर हमारा भी होगा मकाँ
झूम उठ्ठी यही सोचकर कहकशाँ
हो सफलता मुबारक ज़मीं-ओ-गगन
यह जहाँ सारा नाचे है होकर मगन
काम जो भी करें दिल में रखते लगन
दुश्मनों के दिलों में लगी है अगन
अह्द हमने किया राज़ होंगे अयाँ
झूम उठ्ठी यही सोचकर कहकशाँ
चाहें करले हमीं पर तू कितने सितम
कम न होगा हमारा ख़ुदा में भरम
ऐ ख़ुदा हमपे करना हमेशा करम
शुक्र 'आदित्य' को बढ़ रहे हैं क़दम
दस्तरस में हमारी ज़मीं आसमाँ
झूम उठ्ठी यही सोचकर कहकशाँ
Aatish Muradabadi