Upendra singh

लोरी सुनाके आप न हमको सुलाइए
भूखे को दूर से न यूँ चंदा खिलाइए

हम पर उछालो कीच बड़े शौक से मगर
दामन के अपने दाग़ तो पहले छिपाइए

दरबार मे जो आपको टिकना है देर तक
सिर को झुकाके पूँछ ज़रा-सी हिलाइए

मुझपर उठेगी एक तो तुमपर उठेंगी तीन
उँगली उठाइये तो समझकर उठाइये

अच्छाइयाँ फ़क़त मुझे सुननी नही यहाँ
मुझको तो मेरे ऐब भी खुलकर बताइए
Upendra singh

Upendra singh | We The Sukhanwar