Rakhi Alp

जवाँ दिल जिस तरह शौक़-ए-विसाल-ए-यार से महके
अदीबों की हर एक महफ़िल मेरे अशआर से महके

फ़क़त इतनी-सी ख़्वाहिश है शुरू से लेके आख़िर तक
किताब-ए-ज़ीस्त मेरी मेरे ही किरदार से महके
Rakhi Alp

Rakhi Alp | We The Sukhanwar