जवाँ दिल जिस तरह शौक़-ए-विसाल-ए-यार से महकेअदीबों की हर एक महफ़िल मेरे अशआर से महकेफ़क़त इतनी-सी ख़्वाहिश है शुरू से लेके आख़िर तककिताब-ए-ज़ीस्त मेरी मेरे ही किरदार से महकेRakhi Alp