समय ज़रूर मेरा मुझपे मेहरबान नहींभविष्य भूत मेरे हक़ में वर्तमान नहींमगर ज़रा-सी किसी चोट से बिखर जाएमेरा वजूद कोई रेत का मकान नहींRakhi Alp