आप यूँ डाली से ये पत्ता न तोड़ें
इक शजर का इक हसीं हिस्सा न तोड़ें
शोर कितना भी करें झुमके तुम्हारे
इक तपस्वी की बस तपस्या न तोड़ें
हौसले पर बे-तुके से प्रश्न करके
आप तो लड़के का अब जज़्बा न तोड़ें
दिल हमारा मुद्दतों पहले था टूटा
आप इस मलबे का फिर मलबा न तोड़ें
Mukesh Chanchal