ज़मीं पे चल रहा हूँ मैं अकेलाफ़लक पे चाँद तन्हा चल रहा हैअजय 'अद्वैत'
تم اِک بوسے پے غصّہ کر رہی ہوزمانہ میں تو کیا کیا چل رہا ہےअजय 'अद्वैत'