मैं प्रेमिका को छोड़ के अर्धांग्नी के साथ
अब जी रहा हूँ ख़ुश भी हूँ पर इक कमी के साथ
करते हैं एक साथ कई काम कितने लोग
सो नौकरी करूँगा मैं भी शाइरी के साथ
कैसे यक़ीन कर लूँ तेरी बात पे बता
करते हो बात एक-सी तुम हर किसी के साथ
जिसको जहाँ सुकून मिला वो वहाँ पे है
तुम रौशनी के साथ हो मैं तीरगी के साथ
शिकवा किसी से क्या ही करें क्या गिला करें?
दो दिन की ज़िन्दगी है जियेंगे ख़ुशी के साथ
Santosh sagar