Santosh sagar

मैं प्रेमिका को छोड़ के अर्धांग्नी के साथ
अब जी रहा हूँ ख़ुश भी हूँ पर इक कमी के साथ

करते हैं एक साथ कई काम कितने लोग
सो नौकरी करूँगा मैं भी शाइरी के साथ

कैसे यक़ीन कर लूँ तेरी बात पे बता
करते हो बात एक-सी तुम हर किसी के साथ

जिसको जहाँ सुकून मिला वो वहाँ पे है
तुम रौशनी के साथ हो मैं तीरगी के साथ

शिकवा किसी से क्या ही करें क्या गिला करें?
दो दिन की ज़िन्दगी है जियेंगे ख़ुशी के साथ
Santosh sagar

Santosh sagar | We The Sukhanwar