सामने सरकार के कुछ बात रखकर देखिए
बन न पाए बात तो सौग़ात रखकर देखिए
किस क़दर सहमे हुए हैं टूटने के डर से ये
आप इन कच्चे घड़ों पर हाथ रखकर देखिए
आपकी क्या अहमियत है देखना चाहें तो फिर
पत्थरों के सामने जज़्बात रखकर देखिए
आप अपने आप को मुझमें डुबोते जाऍंगे
मुझको अपनी क़ैद में इक रात रखकर देखिए
ये कभी मिलने चले आऍंगे सदियों बाद भी
वक़्त के पन्नों में कुछ लम्हात रखकर देखिए
Nakul Kumar