न बदला है कुछ भी किसी हाल मेंवही हैं मसाइल नए साल मेंज़रा ग़ौर से अब मुझे देखिएवही एक बन्दा ख़द-ओ-ख़ाल मेंकभी तो रिहाई इन्हें भी मिलेजो कब से फँसे हैं किसी जाल मेंमुहब्बत का कीड़ा भी मर जाएगाज़रा ख़ुद को रखिए मिरे हाल मेंNakul Kumar