Nakul Kumar

न बदला है कुछ भी किसी हाल में
वही हैं मसाइल नए साल में

ज़रा ग़ौर से अब मुझे देखिए
वही एक बन्दा ख़द-ओ-ख़ाल में

कभी तो रिहाई इन्हें भी मिले
जो कब से फँसे हैं किसी जाल में

मुहब्बत का कीड़ा भी मर जाएगा
ज़रा ख़ुद को रखिए मिरे हाल में
Nakul Kumar

Nakul Kumar | We The Sukhanwar