दिल-नशीं दिलरुबा नहीं कोई
आप-सा दूसरा नही कोई
जिसकी ख़ुशबू हमें भी मिल जाती
फूल ऐसा खिला नहीं कोई
सारी दुनिया में ढूढ़कर देखा
दर्द-ए-दिल की दवा नहीं कोई
तेरी फ़ुरकत में जी रहे है हम
इससे बढ़कर सजा नहीं कोई
आप यूँ जुल्म कर रहे मुझपर
जैसे मेरा खुदा नहीं कोई
दिल दुखाकर वो कह रहे हैं अब
इसमे मेरी ख़ता नहीं कोई
ज़ख़्म भरते भी किस तरह 'गौतम'
चारागर ही मिला नहीं कोई
Kavi jagmohan gautam musafir