प्यार कर लो

बंध सारे टूटने दो, व्यर्थ सबको रूठने दो
सृष्टि का उद्धार पथ है, तुम इसे स्वीकार कर लो।
प्यार कर लो!

जो विकलता जी रहे हैं
घूँट दुःख के पी रहे हैं
त्याग कर वैभव स्वयं का
होंठ अपने सी रहे हैं
तुम उन्हें दर्पण दिखाओ, नीति चाहत की बताओ
धर्म की प्रस्तावना दो, नेह पर अधिकार कर लो।
प्यार कर लो!

चाँदनी चमके न चमके
भय दिखाएँ चित्र तम के
भाग्य रेखा मिट रही हो
शर चलें चाहे भरम के
तुम सदा दीपक जलाओ, खूब दीवाली मनाओ
जग प्रकाशित कर मिलन का स्वप्न अंगीकार कर लो।
प्यार कर लो!

फूल सूखे सूख जाए
बाग़बां गुलशन जलाए
शूल नित कोई अधर्मी
देव प्रतिमा पर चढ़ाए
तुम मगर पौधा लगाओ, विश्व को सुन्दर बनाओ
सदगुणों की भावना से प्रीति का विस्तार कर लो।
प्यार कर लो!
Piyush Sharma