Devaki Nandan Mishra

साहिल नहीं भँवर के लिए बेक़रार हूँ
उसकी अगर-मगर के लिए बेक़रार हूँ

आ जाये कभी चीख़कर आँखों के रास्ते
मैं ख़ून में असर के लिए बेक़रार हूँ

तुम ही नहीं जो रखते हो भारत से वास्ता
मैं भी तो गुल-मुहर के लिए बेक़रार हूँ

हैं जो निज़ाम-ए-वक़्त वो आँखे दिखा रहे
रहमत-भरी नज़र के लिए बेक़रार हूँ

एक रोज़ वो मिला था जिसे मैंने खो दिया
उस दिन से उम्र-भर के लिए बेक़रार हूँ
Devaki Nandan Mishra