देखते-देखते क्या से क्या हो गए
तोड़कर दिल मेरा लापता हो गए
फ़ासले दरमियाँ कुछ ज़ियादा न थे
जाने क्या सोचकर वो ख़फ़ा हो गए
आरज़ू जिनसे थी यूँ वफ़ा की बड़ी
क्यूँ वफ़ा करने से बेवफ़ा हो गए
रास्ता जिनका हम देखते थे कभी
रास्तें आज उनसे जुदा हो गए
हसरतें जिनकी मग़रूर थी इस कदर
अब ज़माने के वो भी ख़ुदा हो गए
कल पता पूछते थे जो सबसे मेरा
ख़ुद कहीं आज वो गुमशुदा हो गए
Shivani Aarzoo