Khalid Nadeem Budauni

वफ़ा से दूर होते जा रहे हैं
वो अब मग़रूर होते जा रहे हैं

फिर उनका क़ुर्ब पाएँगे किसी दिन
जो हम से दूर होते जा रहे हैं

कभी जिन के मुक़द्दर में थीं ख़ुशियाँ
ग़मों से चूर होते जा रहे हैं

सजाए थे जो ख़्वाब आँखों में मैंने
वो चकनाचूर होते जा रहे हैं

दिए थे ज़ख़्म जितने अक़रबा ने
वो अब नासूर होते जा रहे हैं

जिन्हें दुनिया की हासिल है मसर्रत
वो क्यों रंज़ूर होते जा रहे हैं

अमीर-ए-शहर ने साज़िश रची है
सितम भरपूर होते जा रहे हैं

शराब-ए-ग़म तो तुम ने पी है 'ख़ालिद'
वो क्यों मख़मूर होते जा रहे हैं
Khalid Nadeem Budauni

Khalid Nadeem Budauni | We The Sukhanwar