न सर पे पल्लू न लड़की हिजाब माँगे है
ये अच्छे कल के लिए बस किताब माँगे है
बुजुर्ग दूध दही माँगते थे बचपन में
पर अब बुजुर्गों से बच्चा शराब माँगे है
करो चराग़ों तुम आदाब नन्हें जुगनू को
शरर-सा हो के भी सूरज से ताब माँगे है
पिता ने ख़र्च की बेटे पे उम्र अपनी और
हर एक ख़र्च का बेटा हिसाब माँगे है
नज़र के सामने से चोर सब फ़रार हुए
औ' पासबाँ है कि अपना ख़िताब माँगे है
Dipanshu Shams