Ayush

जो शोर कर रहे थे सियासत की ढाल पर
ख़ामोश हो गए हैं मेरे इक सवाल पर

मेरी नज़र से देख तो गूँगे नहीं हैं लोग
पाबंदियाँ लगी हुईं है बोलचाल पर

कैसे कोई घरौंदा बनाऊँ मैं ऐ ख़ुदा
बैठे हुए हैं साँप दरख़्तों की डाल पर

हर वक़्त उसकी याद में रहता हूँ मुब्तिला
है उसका इख़्तियार मेरे हर ख़याल पर

आसान हो जो मौत का वो रास्ता बता
या छोड़ दे ऐ यार मुझे मेरे हाल पर
Ayush

Ayush | We The Sukhanwar