ये न सोचो फ़क़त भुलाना है
दिल कहीं और भी लगाना है
एक बच्चे से पूछा पढ़ते हो
डर के बोला नहीं कमाना है
अव्वल आना बहुत ज़रूरी है
आइने से नज़र मिलाना है
घर के लोगों ने सपने देखे हैं
हमें ग़ज़लों में सर खपाना है
आज इस छोर पर तो कल उस पार
इन सफ़ीनों का क्या ठिकाना है
Dhirendra Pratap Singh