गंध चुराने वाले लोग

सभी नही अच्छे उपवन में आने जाने वाले लोग!
नज़र गड़ाये हैं कलियों पर गंध चुराने वाले लोग!

पतझड़ तक धीरज तुम धर लो
फिर बहार वापस आयेगी
सच मानों फिर फूल खिलेंगे
डाल-डाल कोयल गायेगी
बुलबुल! तुझे क़ैद कर लेंगे ख्वाब दिखाने वाले लोग!
नज़र गड़ाये हैं कलियों पर गंध चुराने वाले लोग!

अल्हड़पन के धुर दुश्मन ये
यह बहेलियों के वशंज हैं
सपने तहस-नहस कर देंगे
यह सारे मतवाले गज हैं
अक्सर आँसू दे जाते हैं , बहुत हँसाने वाले लोग!
नज़र गड़ाये हैं कलियों पर गंध चुराने वाले लोग!

इंसानी शक़्लों में गिरगिट
पल-पल रंग बदलने वाले
उजले परिधानों में मिलते
हाथ छुपाये अपने काले
सत्य अहिंसा जपते रहते ख़ून बहाने वाले लोग!
नज़र गड़ाये हैं कलियों पर गंध चुराने वाले लोग!
Dr Diwakar Dutta Tripathi 'ganjraha'

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