Dr Diwakar Dutta Tripathi 'ganjraha'

हाथों में गरल तीर हैं षड्यंत्र भरा मन
ऐ व्याध! तुझे शाप है, निश्चित तेरा पतन

पाषाण हृदय को कभी पिघला नहीं सके
मरते हुए कुरंग के आँसू भरे नयन

ख़ुशियों का तू शिकारी उपवन का शोक तू
ईश्वर का न्याय है अटल होगा तेरा दमन

भोले मृगों का मारना व्यवसाय है तेरा
कब तक करेगा नीच तू लोहू से आचमन?

फूटेंगे ये नयन तेरे मृगया की खोज में
चेहरे पे कोई नाग करेगा गरल वमन

ये पाप एक दिन तेरे तड़पायेंगे तुझे
बोये हैं तूने शूल तो होंगे कहाँ सुमन?
Dr Diwakar Dutta Tripathi 'ganjraha'