आदमी बुलबुला है पानी का
क्या भरोसा है ज़िंदगानी का
गोद में प्यार से शुरू होती
दुःख भरा अंत इस कहानी का
चार दिन बाद गुज़र जायेगी
मान करता हैं क्यों जवानी का
घाव तलवार से भी गहरे हैं
असर है तेरी बदज़ुबानी का
मौत आयेगी तो सुनेगी क्या?
क्या असर तेरी लंतरानी का?
Dr Diwakar Dutta Tripathi 'ganjraha'