Dr Diwakar Dutta Tripathi

आदमी बनने से जुदा होना
और इंसान का ख़ुदा होना

ऐब यह आदमी में पुश्तों से
मतलबी बनकर बेवफ़ा होना

साँप मेंढक की हिफ़ाज़त में है
सोच लो अब भला है क्या होना?

‘गंजरहा’ टूटकर बहुत रोया
बहुत मुश्किल है बावफ़ा होना
Dr Diwakar Dutta Tripathi