क्या कहूँ कि आज मन कुछ अनमना है
मर रही सी लग रही संवेदना है
भावनाएँ भग्न होकर रो रही हैं
आँसुओं से स्वप्न रचती कल्पना है
व्याध तूने शोक उपवन को दिया है
नीच! बस तेरे पतन की कामना है
राह में हर मोड़ पर चोरों के साये
अनवरत तुझको बटोही जागना है
ज़िंदगी है झूठ! केवल मौत सच है
मौत से फिर व्यर्थ में क्यों भागना है
Dr Diwakar Dutta Tripathi