Dr Diwakar Dutta Tripathi

क्या कहूँ कि आज मन कुछ अनमना है
मर रही सी लग रही संवेदना है

भावनाएँ भग्न होकर रो रही हैं
आँसुओं से स्वप्न रचती कल्पना है

व्याध तूने शोक उपवन को दिया है
नीच! बस तेरे पतन की कामना है

राह में हर मोड़ पर चोरों के साये
अनवरत तुझको बटोही जागना है

ज़िंदगी है झूठ! केवल मौत सच है
मौत से फिर व्यर्थ में क्यों भागना है
Dr Diwakar Dutta Tripathi

Dr Diwakar Dutta Tripathi | We The Sukhanwar