एक शय जो दिल-ए-मस्कन से नहीं जाती है
और अगर जाए तो जीवन से नहीं जाती है
किसका चेहरा ये तसव्वुर में बसाया तुमने
किसकी तस्वीर है जो मन से नहीं जाती है
आग को और बढ़ाता है हवा का झोंका
जिस्म की भूख भी कंगन से नहीं जाती है
लाख सय्याद ने कोशिश की उड़ाने की मगर
माँ तो माँ ठहरी नशेमन से नहीं जाती है
रक़्स करता है मेरा अक्स मेरे ही अंदर
ये वो काई है जो बर्तन से नहीं जाती है
चंद सिक्कों की मदद क़ैद है तस्वीरों में
तमकनत सिर्फ़ बड़प्पन से नहीं जाती है
मुझको ग़ज़लें कभी तन्हा नहीं होने देतीं
एक चिड़िया कभी आँगन से नहीं जाती है
Lalit Pandey