VIKAS OM SHARMA

ख़ुशी उनको मिली थी देख करके
मेरी आँखों में पानी देख करके

नए आशिक़ ने ख़ुद को मार डाला
रक़ीबों की तरक्की देख करके

अमीरों को अपच होने लगी है
दर-ए-मुफ़लिस पे रोटी देख करके

कहीं नज़दीकियां बढ़ने लगी हैं
हमारे बीच दूरी देख करके

परिंदों से न पूछो क्या हुआ है
कटे पेड़ों की टहनी देख करके
VIKAS OM SHARMA

VIKAS OM SHARMA | We The Sukhanwar