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तुम्हारे जैसा मेरी जान नहीं मिल पाया
पत्थरों में मुझे भगवान नहीं मिल पाया
घूम कर खूब मैने देख लिया जग सारा
मुझको इंसान में इंसान नहीं मिल पाया
DHEERENDRA DHEER

जिस्म रुक जाएगा तिरा जिस पे
और फिर वो ही ज़िन्दगी होगा

सोचता हूँ कि कौन शख़्स आख़िर
तेरे इस दिल को आख़िरी होगा
Mohit Subran (मोहित सुब्रन)

जश्न ए आज़ादी बहुत बहुत मुबारक

कितनी आला है शान भारत की
मीठी मीठी ज़ुबान भारत की

इस की तहज़ीब गंगा जमुनी है
एकता है महान भारत की

माल ओ दौलत भी है फ़िदा इस पर
दिल है भारत का, जान भारत की

हम को दुश्मन समझ रहे हो तुम
हम से बाक़ी है शान भारत की

अमन की रोशनी है फैली हुई
है यही तर्जुमान भारत की

हो जो इंसाफ़ ओ अदल का पैकर
वो संभाले कमान भारत की

लोग रहते हैं सब यहाँ मिलकर
है यही आन-बान भारत की

फ़ैसलؔ इस मुल्क से मोहब्बत है
रूह है पासबान भारत की
Faisal Qadri Gunnauri

विश्व पटल पर डंका बाजे,
जब पीएम परधान रहे |
चीख-चीख के कबहु न बोले,
तबहु ई देश महान रहे,
का बतलाई चहुदिसि थू थू,
इज्जत तारंतार हों गइल
जबसे पद के गरिमा त्यागे,
पीएम चौकीदार हों गइल
राजेश यादव 'करिया'

मेरी जाँ मुझको तुम इक नज़र देख लो
अपनी चाहत का मुझपे असर देख लो
गर जो मुमकिन नहीं है मुलाक़ात तो
हूँ मैं आँखों का प्यासा इधर देख लो
Dheeraj kumar verma

कलम जब थाम रक्खा है तो हर अरमान लिख देंगे
तेरे क़दमो में ऐ भारत हम अपनी जान लिख देंगे

मेरे मौला मेरे मालिक तू इतना हौसला तो दे
गिरे जो ख़ून का कतरा तो हिंदुस्तान लिख देंगे
Dheeraj kumar verma

जो है मुश्किल वो काम कर देंगे
मन को ही चारो धाम कर देंगे
जो भी कह दोगे सर झुका कर के
मेरा वादा है राम कर देंगे
देवेश त्रिपाठी

जिन चरणों के छूने से ,इक नारी का उद्धार हुआ
जिन चरणों को धोने से ,केवट इस भव से पार हुआ
चरणों में जिनके हरदम, हनुमान विराजा करते हैं
मैं उसी चरण का चाकर हूं जो इस जग का आधार हुआ
देवेश त्रिपाठी

बीमार-ए-इश्क़ पर बड़ा एहसान कर दिया,
मुश्किल जो काम था उसे आसान कर दिया।

आकर क़रीब ख़ुद ही ‘अयादत’ के वास्ते,
तुमने तो मेरे जिस्म को बेज़ान कर दिया।
Kamran Abbas

गूँजती हैं कानों में जो
ये सदाएँ हैं कि तुम हो

आ लिपट जाती हैं मुझसे
ये हवाएँ हैं कि तुम हो
Mohit Subran (मोहित सुब्रन)

Goonjti hain kaanon mein jo
Ye sadaayein hain ki tum ho

Aa lipat jaati hain mujhse
Ye havaayein hain ki tum ho
Mohit Subran (मोहित सुब्रन)

گونجتی ہیں کانوں میں جو
یہ صدائیں ہیں کہ تم ہو

آ لپٹ جاتی ہیں مجھ سے
یہ ہوائیں ہیں کہ تم ہو
Mohit Subran (मोहित सुब्रन)