Sher

मैंने ये सोच के बोए नहीं ख़्वाबों के दरख़्त
कौन जंगल में लगे पेड़ को पानी देगा
Aziz Bano Darab Wafa

कुछ और हुनर सीख ले रफ़्तार-ए-ज़िन्दगी
जो कुछ पढ़ा था अब वो किसी काम का नही
Deepak Sopori

दुनिया भी मिले , यार की आग़ोश भी रहे ,
यानी के मय भी चाहिए और होश भी रहे!
Deepak Sopori

वो लोग रेत पे बुनियाद रखके बैठे हैं
हवा का ज़िक्र जिन्हें बदगुमान करता है
Wahid Shahabadi

इक हसीं बन जाये मेरी ज़िंदगी
नौकरी भी एक सरकारी रहे
अब्र लखनवी

आप जैसा दिख रहे हैं मैंने बस वैसा कहा
ठेस कैसे लग गई फिर आपके सम्मान पर
अब्र लखनवी

चांदनी नहीं सबा भी नहीं
माँ का बदल ख़ुदा भी नहीं
Sanjay Gargish

क़ैद में फँसी चिड़िया क्या करे कहाँ जाये
बात करती रहती है पास रखे गमले से
Gyan Prakash Akul

सूलियाँ सजी हैं क्यों जुर्म क्या हुआ आख़िर
तितलियों-सी लड़की से फूल जैसे लड़के से
Gyan Prakash Akul

हर इक सियाहरण के पीछे
कोई स्वर्ण-हिरन होता है
Gyan Prakash Akul