Rubai

ये किस ने कहा आपसे पुर जोश रहो
लेकिन ! न किसी हाल में बेहोश रहो
ये भी तो है इक तौर से ज़ालिम की मदद
ज़ालिम के सितम सह के भी ख़ामोश रहो
Faisal Qadri Gunnauri

गुफ़्तार से भी ज़हर उगलते हैं लोग
गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं लोग
असलाफ़ के रस्ते को पसे पुस्त किया
अब राह पे गुमराही की चलते हैं लोग
Faisal Qadri Gunnauri

सीने में बसी है तेरी तस्वीर अभी
बाक़ी है तिरे इश्क़ की तासीर अभी
फ़ैसल यूं गिरफ़्तार ए मोहब्बत हुआ मैं
पांओं में पड़ी है मिरे ज़ंजीर अभी
Faisal Qadri Gunnauri