अस रूप अनूप कहे गति कौन लुटी मृदुता सब चालन पे।
शत-सूर्य प्रकीर्णन रश्मि करें अस तेज सखी उन गालन पे।
रस-रास रचे वह कुंजन मध्य व नृत्य करे फन व्यालन पे।
छवि देख लुटे सब धाम धरा,बलिहार तिहूँपुर लालन पे।
GARIMA MISHRA
देश में हो हरियाली बनी रहे खुशहाली
जन-जन में सदैव एकता बनी रहे
संविधान हो प्रधान सब गाए राष्ट्रगान
ऊँच-नीच हो न और सौम्यता बनी रहे
शुद्ध रहे संस्कार बढ़ता रहे व्यापार
राष्ट्र को बचाने वाली सभ्यता बनी रहे
नारियों का मान रहे बढ़ता विज्ञान रहे
भारतीय समाज की ये भव्यता बनी रहे
देवेश त्रिपाठी